Showing posts with label Cloud. Show all posts
Showing posts with label Cloud. Show all posts

Wednesday, 24 June 2009

बरस जा बादल

बरस जा बादल
सूरज की आग भरी अंगड़ाई
दुपहरी के तपते तवे को
डूबो दे मिट्टी की खुशबू में
रच जा रूह के नथनों में
कर दे पागल

बरस जा बादल
अब नहीं नहायेगी
सूखे पोखर की दरारों में
कोई अविछिन्नयौवना
न चलायेगी हल
यूं ही यूं ही तरस न बादल

बीज हैं जिंदा
धरती की कब्रों में
बन जल कर दे हल
लहरा जाने दे नभ तक
कोमल कोंपलों का बल

कुओं की गहराई
नदियों के कछार
तालों सागरों का विस्तार
मानव मन भी हार
हुआ है आकुल
बरस जा बादल

www.blogvani.com
Hindi Blogs. Com - हिन्दी चिट्ठों की जीवनधारा

चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी