Showing posts with label वक्त. Show all posts
Showing posts with label वक्त. Show all posts

Wednesday, 17 December 2008

घबराहट

क्यों वक्त में इतना रचा हूं
कि खुद से पूछता हूं
कितना खर्च कितना बचा हूं

बीती यादें बन गई है
आती वादे बन गई है
जिन्दगी क्या हो गई है
कितना गर्क कितना उठा हूं

क्या होश की दवा है इतनी मुश्किल
कि उम्रों तक नींद सपने ही मुमकिन
कुछ नहीं होता महसूस देह बिन
पहले ही कदम मैं इतना थका हूं

मौत की दस्तक है हर पल
डराता है आता जाता कल
धड़कन कहती उबल उबल
बस अब टपका, इतना पका हूं

www.blogvani.com
Hindi Blogs. Com - हिन्दी चिट्ठों की जीवनधारा